Thursday, August 30, 2012

अंदर झांकें हम


भूमिका या प्रस्तावना बनाये बगैर शुरू करें ,आज जिस समय या वक्त से हम गुज़र रहे हैं ! ऐसा नहीं है की वो नहीं गुज़रेगा ये वक्त भी गुज़र जायेगा !
            
             चीजें निराशाजनक हैं ,चीजें दर्द भरी हैं ,चीजें दिल दिमाग और वजूद को झंक्झोरने वाली हैं पर कुछ उम्मीद की किरण हम हिन्दुस्थनिओ को बचा के रखने की आदत है ,वैसे ही जैसे बीवियों को कुछ न कुछ पैसे बचा के रखने की आदत होती है ,चाहे वो रोज़ हाथ खाली होने की बात कहें ,और फिर वो पैसा आपके मजबूरी के दिनों में काम आ जाता है ! बस ऐसी ही किरण हमने भी बचा के रखी है बहरहाल इसके बारे में फिर कभी विस्तार से लिखूंगा !

             सबसे पहले परिस्थितिओं के सत्य को समझना जरूरी है ! एक बात और हिस्टरी(history) निकली है हिस्तोरिया(historia) से जिसका मतलब होता है फ़क्ट शीट (factsheet)! हमारी मजबूरी रही है कि हमें सुनियोजित तरीके से अपनी सच्ची फ़क्ट शीट (factsheet) या कहें तो इतिहास बताया ही नहीं गया ! पहले मुगलकालीन इतिहासकार फिर अंग्रेजी इतिहासकार बाद मैं मार्क्सिस्ट (marxist) और पगले सेकुलर इतिहासकारों ने पुरातन और सच्चे इतिहास को दबा के या यूं कहें बर्बाद करके रख दिया !

            मुगलकालीन इतिहासकारों की बात मानें तो मुग़ल काल में हमने तरक्की की या यूँ कहें इंसान बनें ,अंग्रेजी इतिहासकारों की मानें तो अंग्रेजो के काल में मार्क्सिस्ट और पगले सेकुलर इतिहासकारों की माने तो ऊपर के दोने आतातायियो (ये जरूर इन्हें मुग़ल या अँगरेज़ कहते हैं ) के काल मैं हालां की सारे गलत हैं ! आतातायि शब्द मैंने जानबूझ के किया है क्यूंकि इसके अलावा और कोई शब्द इस्तमाल हो ही नहीं सकता था!

            कई हजार सालों के इतिहास को इन्होने मुख्या रूप से 2000 साल में समेट के रख दिया! और उस 2000 साल के इतिहास को भी झूठ के पुलिंदें में बंद कर दिया !

    ज्यादा लम्बा ब्लॉग नहीं लिख रहा हूँ क्यूंकि पढने वाले ज्यादातर 140 character के आदि हैं आगे दुसरे ब्लॉग में लिखूंगा !

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3 comments:

  1. Yes, Would love to see some conclusion based on the facts that you have highlighted. Advantage with a a Full-blown blog site is that we get to communicate beyond what we could otherwise do with 140 characters. Please detail it even further. Appears that you have touched upon a critical aspect of the discourse - Distorted History (Suppressed too)

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  2. Accha Likha Hai Aapne ... Par Iske Aage Ki Kadiyon Ka Intezaar Hai ... Waise Ek Halki Si Khabar Hai Ki Nayi Govt. Aane Ke Baad History Waapas Likhi Jaani Hai ... Ummeed To hai.

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