Thursday, February 14, 2013


आज से ही नहीं शुरू किया तो बहुत देर हो जाएगी

पता नहीं चुनाव आते ही या तो हमारी याददास्त कमज़ोर हो जाती है या तो मतिभ्रष्ट शायद तभी असामाजिक ,अनैतिक ,राष्ट्र विरोधी लोग सत्ता में आ जाते हैं।

           मैं आग्रह करना चाहूँगा भा.ज.पा से अपनी अन्दर की लड़ाई,बडबोलेपन और Over confidence से बाहर आयें वर्ना 2009 का इतिहास फिर दोहरा दिया जायेगा।शहरों की आबादी  TV Debate,न्यूज़ से पूरी जानकारी और उसके दूरगामी परिणाम जान के UPA के बेईमानी,धोखेबाजी के इतिहास को जानने समझने लगे हैं शायद इसका फायदा Anti UPA  को हो,पर एक बात तो तय है शहर का वोटर भा.ज.पा और आ आ प (AAP) में बंट कर रह जायेगा,UPA का जो जनाधार खिसकेगा वो बंट जायेगा,भा.ज.पा और आ आ प (AAP)के वोट विभाजन का फायदा UPA को ही मिलेगा इसे हमें ध्यान में रखना चाहिए।शायद कल  भा.ज.पा और आ आ प (AAP), UPA विरोध के नाम पर हाँथ भी मिला लें पर ये फैसला भा.ज.पा के लिए आत्मघाती ही होगा।क्यूंकि आ आ प(AAP) के कुछ पदधिकरिओं को नितीश कुमार वाली बीमारी है,झूठे सेकुलरिज्म वाली खुजली है,जिससे आने वाले समय में Black Mailing की जमीन ही खड़ी होगी और कुछ नहीं।

         प्रधानमंत्री की लड़ाई भी एक अहम् मुद्दा बनने वाली है।अडवाणी जी का शायद जिन्ना वाला बयान ही लोगों को याद है(या शायद किसी कारन वश याद दिलाया जाता है),जिस कारन लोग उनसे किनारा कर रहे हैं।मैं उनके उस बयान की ज्यादा गहराई में नहीं जाऊंगा,मैं भी यही मानता हूँ की जिन्ना मूल रूप से सेक्युलर ही था पर लालच वश जरूर कटर्रता दिखाता था।हमें एक बात का ध्यान और रखना चाहिए वो बयान पाकिस्तान में दिया गया था।मोदीजी (जो की मेरी भी पसंद हैं) निसंदेह  प्रधानमंत्री पद के प्रबल और काबिल दावेदार हैं ,पर एक चीज हमें जान लेनी चाहिए,अगर किसी व्यक्ति या परिस्थति की वजह से पार्टी में वो स्थति आ जाये जिससे बिखरने का खतरा हो तो उसपे फैसले को लेने के लिए सही समय और परिस्थति का इंतजार करना बुद्धिमानी होता है।आज की तारीख में मोदी जी के आने से निसंदेह भा.ज.पा के एक बड़े तबके में असहजता आ सकती है (भगवान ऐसे लोगों को सदबुद्धि दे क्यूंकि ऐसी परिस्थति में देश का अहित ही होगा),साथ ही मैं NDA के समझदार नेताओं से समझदारी की आशा रखता हूँ बचपने की नहीं।

       अब मैं अपनी पहली बात को आगे विस्तार देता हूँ केंद्र की सत्ता मेट्रो,कैपिटल्स या बड़े शहरों से तो निकल के नहीं आएगी,उसके लिए गाँव की तरफ मुड़ना पड़ेगा।जो शायद भा.ज.पा ने आज कल छोड़ दिया है,ये जान लीजिये चुनाव चाहे 2013 के अंत में हों या 2014 में भा.ज.पा को गाँव गाँव घूमना पड़ेगा,6 लाख गाँव हैं आज से ही नहीं शुरू किया तो बहुत देर हो जाएगी।

      अधिकतर गाँव के लोग इन 100+ घोटालों का तथ्यात्मक सच नहीं जानते,उन्होंने अगर इनके बारे में सुना है तो भी इसकी गंभीरता और इस्ससे पड़ने वाले उनकी जिंदगी के असर को नहीं समझते,उन्हें बढती महंगाई याद दिलानी होगी,समझाना होगा Corruption से गया धन कैसे उनकी प्रगति का बाधक है और उनकी गरीबी का कारन।मुददे और भी उन्हें समझाए जा सकते हैं भा.ज.पा इस में सक्षम है ऐसा मैं आशा करता हूँ।

      देश की सेवा करते हुए सत्ता में आने के लिए, 2014 जीतने के लिए गावों कस्बो की तरफ मुड़ो ,अपने छेत्रिय नेताओं जो की VIP के भी VIP हो गए हैं,कुत्ते बिल्ली की लड़ाई में व्यस्त हैं,उनके कान पे बजाएं,उन्हें नींद से जगाएं।अभी काम बहुत बाकि है इस लिए खुद भी जागिये और पार्टी कैडर को भी जगाइए।

बस एक ही अनुरोध है "आज से ही नहीं शुरू किया तो बहुत देर हो जाएगी" 


धन्यवाद्

अरुण कुमार तिवारी



    
      

5 comments:

  1. Bandhu, this is a very accurate analysis & the need of the hour!!! true enough & very well said!!! :-)

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  2. EKDUM Satya.AAj se agar nahi nikle to bahut der hojayegi.Abhi se BJP walon ko gao gaon ghumna padega aur isike liye Narendra Modi jaisa kaddavar neta hi chunav prachar ke neta ke liye upyukt hain.Unhone Gujarat me har ek karyakarta se baat kara aur unko prerit kiya hur polling booth me jakar voter ko lekar aaye

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  3. xcellent analysis,ur absoloutely correct, but hindus r following bad hinduism not of Rana Pratap,Veer Shivaji hence i dont xpect any change,neither bjp nor any other going2 solve nation's crises,v need a leader like SC BOSE

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  4. its a summary of lesson from past history.

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